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पाथेय

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कामना के लोभ में, भगवान बदलते रहे । बदलाव खुद में न किया, आराध्य बदलते रहे। तम को प्रियतम बना, हमने बुझाए दीप सब । पथ में लक्ष्य भूलकर,   बस अनवरत चलते रहे। आवागमन के चक्र में, विराम न मिल पाएगा। यह अभी प्रारंभ है, क्या अंत कभी आएगा ? बंधनों से मुक्ति ही, जिसने बनाया ध्येय है। उसके लिए तो श्रद्धा ही, इस मार्ग का पाथेय है ।  - सुधीर    शांतिकुंज

पर्यावरण दिवस 5 जून 2024

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जब जायेंगे हम इस धरा से  सब धरा रह जायेगा, केवल हमारे दोष - गुण का  स्मरण रह जायेगा। शेष जीवन का नियोजन  शुभ सुफल निश्चित करेगा, धन्य  होगा उसका जीवन  सन्मार्ग जो अपनाएगा । अनुदान धरती से मिला जग अनुमान क्या कर पाएगा । इस धरा-शोषण का ये   दुष्चक्र न चल पाएगा । मानव जगत इस भूमि से तब ही उऋण हो पाएगा। जन जन करेगा वृक्षारोपण, हर आंगन हरा हो जायेगा ।

नींद में सोया बच्चा

कौन है झूठा कौन यहां पर सच्चा है, इसीलिए खुद से ही मिलना अच्छा है, सब उलझे हैं रंग बिरंगी दुनिया में, अपना दिल तो नींद में सोया बच्चा है, वो खुश हैं, वो सब चालों से वाकिफ हैं, आज ज़माना  उनके ही मनमाफिक है, कल क्या होगा इसकी उनको ख़बर नहीं, धोखा देने वाला मन का कच्चा है । आज जो पद या पदवी तुम्हें रिझाती है, कल वो किसी और की भी, हो जाती है, मत भूलो दो चार दिनों की खुशियां हैं, विजय होगा वही जो मन से सच्चा है ।

कोई और नहीं है

किसी का दुख बंटा सके जो कोई नहीं है तेरी  सदा को सुन सके जो कोई नहीं है, नारों के शोर से तो दुआ घुट गई यहां, गीतों पे झूमता हुआ अब कोई नहीं है, केवल किसी की हां में हां करने लगे है लोग, सच को तो सच बता सके जो कोई नहीं है, दोस्तों ने पीठ पे है जख्म दे दिया, मरहम लगा सके जो यहां कोई नहीं है, शामिल हैं पहरेदार भी इस आगजनी में, इस आग को बुझाने वाला कोई नहीं है, जिसको थमाई उंगलियां वो हाथ ले गया, सफर में हमसफ़र बने जो कोई नहीं है, जिनको समझ के राजदार, दिल खोला आपने, रुसवाई भी उन्हों ने की, कोई और नहीं है, साया भी साथ छोड़ता जब सर पे धूप हो, मंजिल तलक जो चल सके, कोई नहीं है । तुमने दिखा दिया जिसे दिल खोल कर यहां , खंजर वही चलाएगा कोई और नहीं है , उंगली पकड़ जो घुस गए हैं आस्तीन में, डस लेंगे वो ही एक दिन कोई और नहीं है, अपना चिराग खुद बनो ये मंत्र है सुधीर रस्ता दिखाने वाला यहां कोई नहीं है ।                                                  ...

एक छोटा दीप

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चाँद तो छुप जाएगा ये बादलों में, दीप फिर भी रातभर जलता रहेगा, जुगनुओं के हौसले तो पस्त होंगे, पर अकेला तम से ये लड़ता रहेगा ।  तम अधिकतम  हो तो हो डरता नहीं है, मैं हूँ अकेला सोचकर बुझता नहीं है, यदि स्नेह भीगी वर्तिका का साथ होगा यह टिमटिमाएगा मगर जलता रहेगा ।  अल्प जीवनकाल का यदि सार्थक उपयोग होगा, श्रेय और सम्मान का भी  सुखद संयोग होगा, रोशनी का जब कभी इतिहास लिखा जाएगा, तब प्रथम पृष्ठों में यह स्थान निश्चित पायेगा ।                            - सुधीर भारद्वाज

त्याग दो मन का मलाल

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जब किसी का मांगना माफी हो अभिनय का कमाल, बातों में आने का उसकी है नहीं उठता सवाल।  जब  तुम्हारी आंख खुल जाए सबेरा  मान लो, सो गए यदि जागकर तो उम्रभर होगा मलाल ।  जो छूट जाते राह में मत राह उनकी ताकना, चलते रहे यदि तुम निरंतर, ज़िन्दगी होगी निहाल ।  जब कोई संबंध मन के मान को दूषित करे, मत सहो पीड़ा, समझकर कांटा उसको दो निकाल।  कोई समझौता कि जिसका आत्मा ही मूल्य हो, है उचित ठुकराना उसको चाहे जितना हो बवाल ।  सत्य में होता हज़ारों हाथियों का बल मिला, झूठ और पाखण्ड टिक पाएंगे झूठा है ख़याल ।  होता नहीं है अंत जीवन में बिखरना स्वप्न का, संकल्प लेकर जुट पड़ो तो फिर नया होगा कमाल । - सुधीर भारद्वाज

जीवन समर

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                                                                                                   जीवन में मंज़िल पाने का बस एक ही रस्ता नहीं   सैकड़ों पगडंडियाँ  पहुंचाती हैं हमको वहीं ।  उसको निराशा घेर कर ही लूट लेगी राह में , यंत्रणा ही हस्तगत होगी खुशी की चाह में , पकड़ी है जिसने लीक लेकिन दृष्टि को खोला नहीं, क्षमता है कितनी हौसलों में यह कभी तौला नहीं,  इसलिए पाथेय अपना धैर्य को ही मान लें, है भरोसा खुद पे तो, निश्चित सफलता जान लें, जीवन समर में  जो रुका इतिहास उनको भूलता पुस्तकों में उनकी कहानी फिर नहीं मिलती कहीं ।  जो बनाते मार्ग वो, पदचिन्ह भी हैं छोड़ते, रास्ता तूफान का नदियों का भी हैं मोड़ते, उनको नमन आकाश भी करता है वसुधा पूजती उनकी प्रतिष्ठा ...