खुद को खुदा बताने वाले लोग
सिमट गए इतिहास की किताबों में,
खुद को खुदा बताने वाले लोग
आपक दर्द पर खिलखिलाते हैं,
आपको अपना बताने वाले लोग,
दिल से पाकसाफ होते है,
चार रोटी कमाने वाले लोग,
एक खंजर भी छुपा के रखते हैं,
आपको सीने से लगाने वाले लोग,
बहुत बदरंग भी हैं अंदर से,
यूँ ही गुलाल उड़ाने वाले लोग,
खुद भी लहूलुहान होते हैं,
राह में कांटे बिछाने वाले लोग,
दिल में एक दर्द लेके जीते हैं,
अकसर गुनगुनाने वाले लोग,
जाने किस उम्मीद पर जीते हैं,
ज़िंदगी से धोखा खाने वाले लोग ।
दूर रह के भी दिल के पास होते हैं,
वक़्त पे काम आने वाले लोग ।
खुद को खुदा बताने वाले लोग
आपक दर्द पर खिलखिलाते हैं,
आपको अपना बताने वाले लोग,
दिल से पाकसाफ होते है,
चार रोटी कमाने वाले लोग,
एक खंजर भी छुपा के रखते हैं,
आपको सीने से लगाने वाले लोग,
बहुत बदरंग भी हैं अंदर से,
यूँ ही गुलाल उड़ाने वाले लोग,
खुद भी लहूलुहान होते हैं,
राह में कांटे बिछाने वाले लोग,
दिल में एक दर्द लेके जीते हैं,
अकसर गुनगुनाने वाले लोग,
जाने किस उम्मीद पर जीते हैं,
ज़िंदगी से धोखा खाने वाले लोग ।
दूर रह के भी दिल के पास होते हैं,
वक़्त पे काम आने वाले लोग ।
- सुधीर भारद्वाज
बहुत खूब
ReplyDeleteवाह 🙏🏻 आप ये सारी रचनाएं प्रतिलिपि एप पर भी प्रकाशित कीजिए।
ReplyDeleteवाह , बहुत खूब
ReplyDeleteएक और सुंदर रचना । आनंदम ।
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