नीति काम आती है
अनय जब सर उठाता है, तो नीति काम आती है,
यही सद्ज्ञान चिंतन में गुरुसत्ता पिरोती है,
अनीति शस्त्र आधारित, नीति शास्त्र सम्मत है,
मगर ये राजनीतिक दृष्टि तो गुड़ गोबर कराती है ।
कोई कुत्ता हमें काटे, तो क्या हम उसको काटेंगे?
करेंगे आत्मरक्षा हम स्वयं ले दंड हाथों में,
है ये बात इतनी ही, मगर ये भूल है होती ,
लेकर पुष्प की आशा कुटिलता कांटे है बोती |
किसी निश्छल ह्रदय को हम भले कायरता ही समझें ,
मगर गहरे समंदर में सदा लहरें नहीं होतीं ,
सदियों मौन रहते हैं कई भूधर धरा पर भी ,
मगर जब फूटते ज्वालामुखी, धरती भी तब रोती |
कहता कौन है हमको, सहें सबकुछ समय काटें,
गिरा दो उन दीवारों को जो आँगन भाई का बांटें,
किसी भी स्थिति में श्रेष्ठता विचलित नहीं होती ,
न डरती है किसी से ये न अपना धैर्य है खोती ।
*-सुधीर भारद्वाज*
यही सद्ज्ञान चिंतन में गुरुसत्ता पिरोती है,
अनीति शस्त्र आधारित, नीति शास्त्र सम्मत है,
मगर ये राजनीतिक दृष्टि तो गुड़ गोबर कराती है ।
कोई कुत्ता हमें काटे, तो क्या हम उसको काटेंगे?
करेंगे आत्मरक्षा हम स्वयं ले दंड हाथों में,
है ये बात इतनी ही, मगर ये भूल है होती ,
लेकर पुष्प की आशा कुटिलता कांटे है बोती |
किसी निश्छल ह्रदय को हम भले कायरता ही समझें ,
मगर गहरे समंदर में सदा लहरें नहीं होतीं ,
सदियों मौन रहते हैं कई भूधर धरा पर भी ,
मगर जब फूटते ज्वालामुखी, धरती भी तब रोती |
कहता कौन है हमको, सहें सबकुछ समय काटें,
गिरा दो उन दीवारों को जो आँगन भाई का बांटें,
किसी भी स्थिति में श्रेष्ठता विचलित नहीं होती ,
न डरती है किसी से ये न अपना धैर्य है खोती ।
*-सुधीर भारद्वाज*
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